टीईटी अनिवार्यता समाप्ति हेतु राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का सांसद संपर्क एवं सांसद समर्थन अभियान शुरू
लखनऊ, 23 जून। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने कहा है कि टीईटी लागू होने से पहले से सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता समाप्त कराने की मांग को लेकर सांसद संपर्क एवं सांसद समर्थन अभियान चलाया जाएगा। संगठन के अनुसार, यह अभियान 5 जुलाई 2026 तक चलेगा।

संगठन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की आभासी बैठक में इस निर्णय पर सहमति बनी। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर नारायण लाल गुप्ता ने की और संचालन राष्ट्रीय महामंत्री प्रोफेसर गीता भट्ट ने किया। विज्ञप्ति में राष्ट्रीय पदाधिकारियों तथा राज्यों के अध्यक्ष, महामंत्री और संगठन मंत्री के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में संपर्क की योजना
प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह के अनुसार, अभियान के दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में जिला इकाइयां सांसदों से मिलेंगी। संगठन का कहना है कि सांसदों को ज्ञापन देकर टीईटी लागू होने से पहले से कार्यरत शिक्षकों के मामले में समर्थन मांगा जाएगा।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह मांग लाखों सेवारत शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और गरिमा से जुड़ी है। महासंघ ने सांसदों के समर्थन की अपील करते हुए कहा कि संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर चर्चा और समाधान के लिए विधायी रास्ते पर विचार होना चाहिए।
संगठन का पक्ष
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ का मत है कि टीईटी लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए अनिवार्यता समाप्त की जानी चाहिए। यह संगठन की मांग है; इस संबंध में सरकार या संसद की ओर से किसी नए निर्णय की जानकारी इस प्रेस विज्ञप्ति में नहीं दी गई है।
प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अभियान की जानकारी दी।